एक अद्भुत, दवाई
कई बार बच्चे, बड़ो से भी जयादा समझदार होते है। खासकर जब घर में बुजर्गों का साथ हो। जैसे दादा-दादी, नाना-नानी, कियों क़ि बुजुर्गो का अपने पोते - धोतों से कुछ जयादा ही प्यार होता है।
वो कहते है न :- " असल से जयादा - सूद प्यारा "
रमा और रमेश दोनों अपने काम में बहुत व्यस्त रहते थे और माँ बीमार रहने लग पड़ी , धीरे - धीरे खाना पीना भी छूटने लगा और जयादा समय बिस्तर पर लेटी रहती थी। अब दवा भी अपना असर नहीं करती थी, इस लिए डाक्टरों ने भी जवाब दे दिया और कहा कि घर पर जितनी सेवा करनी है कर लो।
माँ के पास बैठने के लिए रमा और रमेश के पास जयादा टाइम नहीं निकलता था। इसलिए उसकी देखभाल के लिए एक आया रख ली थी, जो दिन रात उनकी देख -रेख करती थी , लेकिन माँ की सेहत में कोई सुधार नहीं आया। बच्चे हॉस्टल में थे, विभा और रमन, बच्चों को हॉस्टल से बुला लिया। काम की वजह से दोनों पति-पत्नी काम पर बाहर चले जाते थे।
बच्चे बार -बार अपनी दादी को देखने लिए कमरे में जाते थे और दादी को बुलाते थे, दादी तुम कियों लेटी हुई हो उठो न दादी , हमारे साथ बात करो । जैसे ही दादी ने आँखें खोली और कांपते हाथो से बच्चों के सर पर हाथ रखा दोनों बच्चे दादी से लिपट गए और बोलने लगे हमै भूख लगी है दादी तुम कितना अच्छा खाना बनती हो, बनाओ न हमारे लिए खाना, हमें हॉस्टल का खाना कभी स्वाद नहीं लगता ।
आया ने बच्चों को डांटा और बाहर जाने को कहा.
अरे ये क्या , जो दादी काफी समय से बिस्तर पर बीमार पड़ी थी , वो अचानक उठ गई और उस आया को डाँट कर कहने लगी, ख़बरदार जो मेरे बच्चों के कुछ कहा, हट यहाँ से।
आया बोली , मैंने तो आपके लिए कहा ये आपको डिस्टर्ब न करे
आया हैरान थी क़ि कल तक तो कोई दवाई काम नहीं कर रही थी अचानक ये बदलाव {चेंज। उसकी समझ से बाहर था सब।
दादी ने आया को कहा कि मेरी खांना बनाने में मदद करे। पहले तो नर्स को कुछ समझ नहीं पाई क़ि क्या हो रहा है , फिर उसने भी साथ दिया
खाना बनाने के बाद बच्चों को बुलाया और सब इक्ठ्टे बैठ कर खाना खाने लगे
दादी के चेहरे पर ख़ुशी थी . वह बच्चों के पास बैठकर उन्हें खिलाने लगी .
बच्चों ने भी दादी के मुंह में निबाले खिलाये. दादी की आँखों से आंसू बहने लगे .
'दादी ! तुम रो क्यों रही हो ? दर्द हो रहा है क्या ? मैं आपके पैर दबा दूं .'
'अरे! नहीं, ये तो बस तेरे बाप को याद कर आ गए आंसू, वो भी ऐसे ही खाताा था मेरे हाथ से . और अब इतना बड़ा आदमी हो गया है कि उसे
माँ को मिलने का टाइम ही नहीं मिलता है।
दादी आप ठीक हो जाओ, हम आपके साथ ही रहेंगे और आपके
हाथ से ही खाएंगे खाना।
और पढ़ाई कौन करेगा , तुम्हारी माँ तुमें यहाँ रहने देगी तब न ?
दादी हम अब कही नहीं जायेंगे , यही रह कर पड़ेगें। दादी ने दोनों बच्चों को सींने से लगा लिया
अब नर्स ने इस इलाज के बारे में कभी पड़ा ही नहीं था, अपनी लाइफ में।
अद्भुत दवाई थी ये , जिसने दादी को फिर से जिन्दा कर दिया।
अपनों के साथ मिल- जुल कर प्यार से रहने कि दवा।
दादी ने उस आया को देख कर कहा कि, आज के डॉक्टर और नर्स क्या जाने कि पहले लोग इतनी लम्बी और सेहतमंद जिंदगी कैसे जीते थे ?
गांव में रहते थे, घर में गाये पालते थे, खेतों में काम करना, कुंए से पानी लाना , मसाले कूटना, अनाज दलना, दही बिलोना मख्खन निकलना
एक साथ घर में १५ - २० लोगों का खाना बनता था ना कोई मशीन होती थी हर काम हाथ से करते थे, फिर भी लोग
सेहतमंद रहते थे उनके दांत भी स्वस्थ रहते थे और चश्मे भी नहीं लगते थे और क्या बताएं ये सब परिवार में इकठे मिल- जुल कर रहने से होता था
नर्स तो ये सुन कर हैरान रह गई। और दादी ठीक हो गई
तो आइए , हम भी बने अपनों की दवाई
एक अद्भुत, दवाई




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